Wednesday, January 22, 2020

JNU controversy: Delhi Police's awesome, FIR made 2 days before vandalism in server room

JNU विवाद: दिल्ली पुलिस का कमाल, सर्वर रूम में तोड़फोड़ से 2 दिन पहले कर दी FIR




जब 1 जनवरी को सर्वर रूम में तोड़फोड़ नहीं हुई तो 1 जनवरी की किस घटना के लिए एफआईआर दर्ज करवाई गई. सवाल ये भी है कि 3 जनवरी की घटना के लिए बैकडेटे से एफआईआर क्यों दर्ज कराई 





JNU विवाद: दिल्ली पुलिस का कमाल, सर्वर रूम में तोड़फोड़ से 2 दिन पहले कर दी FIR

जब 1 जनवरी को सर्वर रूम में तोड़फोड़ नहीं हुई तो 1 जनवरी की किस घटना के लिए एफआईआर दर्ज करवाई गई. सवाल ये भी है कि 3 जनवरी की घटना के लिए बैकडेटे से एफआईआर क्यों दर्ज कराई गई

  • 1 जनवरी को तोड़फोड़ की घटना नहीं
  • FIR में घटना की तारीख 1 जनवरी
  • RTI के खुलासे से उठे सवाल

जेएनयू हिंसा मामले में एक नया खुलासा हुआ है. आरटीआई से मिली एक जानकारी में पता चला है कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में बैक डेट से एफआईआर दर्ज की है.

रिपोर्ट के मुताबिक जेएनयू के सर्वर रूम में तोड़फोड मामले में दिल्ली पुलिस ने दो FIR दर्ज किया है. इसके मुताबिक  1 जनवरी और 4 जनवरी को सर्वर रूम को निशाना बनाया गया था. लेकिन आरटीआई के तहत मिली जानकारी में पता चला है कि 1 तारीख को तोड़ फोड़ की कोई घटना नहीं हुई है.

RTI से हुआ खुलासा

दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के सर्वर रूम को नुकसान पहुंचाने के लिए 2 एफआईआर दर्ज की थी. इसके मुताबिक 1 जनवरी 2020 और 4 जनवरी 2020 को लेफ्ट से जुड़े छात्र सगंठनों के सदस्यों ने सर्वर रूम में हिंसा की थी. इस दौरान JNUSU की अध्यक्ष आइशी घोष भी शामिल थी.

हालांकि RTI से मिली एक जानकारी दूसरी ही बात कहती है. आरटीआई में बताया गया है कि 1 जनवरी को सर्वर रूम में तोड़फोड़ की कोई वारदात नहीं हुई है. इंडिया टुडे के पास मौजूद आरटीआई की कॉपी के मुताबिक कहानी कुछ अलग है. आरटीआई में पूछा गया था कि 25 दिसंबर 2019 से 8 जनवरी 2020 तक तोड़ फोड़ की कितनी घटनाएं हुई, जबकि जेएनयू का मुख्य सर्वर डाउन था.



1 जनवरी की घटना को लेकर दर्ज की गई FIR की कॉपी

इस सवाल के जवाब में जेएनयू ने कहा, " दो घटनाएं हुई. पहली-

 का मुख्य सर्वर 3 जनवरी को बंद करा दिया गया. ये घटना 1.30 बजे हुई. दूसरी- 4 जनवरी को पावर सप्लाई में आई बाधा की वजह से 1.30 बजे जेएनयू का मुख्य सर्वर बंद हो गया.



1 जनवरी को तोड़फोड़ नहीं, तो FIR कैसे

अब सवाल ये है कि जब 1 जनवरी को तोड़फोड़ नहीं हुई तो 1 जनवरी की किस घटना के लिए दर्ज करवाई गई. सवाल ये भी है कि 3 जनवरी की घटना के लिए बैकडेट में एफआईआर क्यों दर्ज कराई गई.

NCPRI ने मांगी थी सूचना

आरटीआई के तहत ये जानकारी सौरव दास ने मांगी थी. सौरव दास नेशनल कैम्पेन फॉर पीपल्स राइट नाम की संस्था के सदस्य हैं. इस आरटीआई में ये भी कहा गया है कि सर्वर रूम के मुख्य गेट पर लगे बायोमैट्रिक सिस्टम और कैमरा को न तो 3 जनवरी और न ही 4 जनवरी को तोड़ा गया था. आरटीआई से यह भी जानकारी सामने आई है कि जेएनयू कैंपस के मेन गेट पर कोई सीसीटीवी सर्वर नहीं लगाया गया है.


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