Tuesday, January 14, 2020

Pakistan: Musharraf escaped death sentence! Sentencing court unconstitutional

पाकिस्तान: फांसी के फंदे से बच गए मुशर्रफ! सजा सुनाने वाली अदालत असंवैधानिक करार



लाहौर हाईकोर्ट ने सोमवार को उस विशेष अदालत को 'असंवैधानिक' करार दे दिया ,जिसने पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल (रिटायर्ड) परवेज मुशर्रफ को संगीन देशद्रोह का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई 



पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल (रिटायर्ड) परवेज मुशर्रफ (फाइल फोटो-PTI)



  • असंवैधानिक बताया
  • एक अदालत ने 17 दिसंबर 2019 को मौत की सजा सुनाई थी

लाहौर हाईकोर्ट ने सोमवार को उस विशेष अदालत को 'असंवैधानिक' करार दे दिया, जिसने पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल (रिटायर्ड) परवेज मुशर्रफ को संगीन देशद्रोह का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई थी. लाहौर हाईकोर्ट ने यह फैसला मुशर्रफ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया. इसमें मुशर्रफ ने उन्हें दी गई मौत की सजा को चुनौती देते हुए विशेष अदालत के गठन पर सवाल खड़ा किया था.

अदालत ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ के खिलाफ का मुकदमा कानून के मुताबिक नहीं चलाया गया. मुशर्रफ को इस मामले में विशेष अदालत ने 17 दिसंबर 2019 को मौत की सजा सुनाई थी. यह मामला 2013 में तत्कालीन पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) सरकार द्वारा दायर कराया गया था.



मुशर्रफ ने अपनी याचिका में लाहौर हाईकोर्ट से आग्रह किया था कि वह 'संविधान के प्रावधानों के खिलाफ होने के कारण विशेष अदालत के फैसले को रद्द करे, अवैध और असंवैधानिक करार दे तथा क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर दिया गया फैसला' घोषित करे.

जस्टिस सैयद मजहर अली अकबर नकवी, जस्टिस मोहम्मद अमीर भट्टी और जस्टिस मसूद जहांगीर ने मुशर्रफ की याचिका की सुनवाई की.


अदालत के पूर्व के आदेश के तहत अतिरिक्त महान्यायवादी इश्तियाक ए खान ने संघीय सरकार की तरफ से सोमवार को पेश होते हुए विशेष अदालत के गठन से संबंधित रिकॉर्ड पेश किए. उन्होंने बताया कि मुशर्रफ के खिलाफ मामला चलाया जाना कभी किसी कैबिनेट की बैठक के एजेंडे में नहीं रहा. उन्होंने कहा, "यह एक सच्चाई है कि मुशर्रफ के खिलाफ मामला सुनने के लिए विशेष अदालत का गठन कैबिनेट की मंजूरी के बिना किया गया."



उन्होंने कहा कि संविधान के 18वें संशोधन के तहत आपातकाल लगाने को अपराध घोषित किया गया, लेकिन यह संशोधन बाद में हुआ था. इसलिए इस संशोधन से पहले लगाए गए आपातकाल पर यह कैसे लागू हो सकता है. अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 6 में किए गए इस संशोधन को भी अवैध करार दिया.

अदालत ने कहा कि मुकदमा आरोपी (मुशर्रफ) की अनुपस्थिति में चलाया गया जिसे कानूनी रूप से सही नहीं कहा जा सकता. साथ ही, जिस विशेष अदालत में यह मुकदमा चला, उसके गठन में भी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया गया.

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